खफा

रूह मुझसे खफा है
ज़िन्दगी है नाराज़
चाहती हूँ देना
किसी को अपनी आवाज़
आरजू है की सुने मुझे भी कोई
चाहत है देखे मुझे भी कोई
झरोखे से देखती हूँ छुप कर
बदल की ओ़ट से निकल कर चाहती हूँ मिलना
मगर क्या करून रूह मुझसे खफा है
ज़िन्दगी है नाराज़ ........

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